UA-149348414-1 कंगना की भीख वाली आजादी का जवाब

 कंगना की भीख वाली आजादी का जवाब


लाठियों की चटक ने चमड़ीयों को छिला था,

हंसते हुए फंदे को झूला था,


घोड़ो की नाल को...जलियांवाला के गोलियों के काल को झेला था,


एक बूढ़ा जो अन्न त्याग देता था,

कई सिरफिरे, जो जेलों में आजादी को आग देते थे,


कंगना भीख में तुम्हें अवार्ड मिला होगा,

आजादी तो लहू के फ़ुहारों 

तेज विचारों और

जोशीले हुंकारों से मिली थी।


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