UA-149348414-1 धर्म खतरे में हैं

 धर्म खतरे में हैं

Kashish-bagi-poetry


धर्म खतरे में है।


मैंने कभी धर्म का लहू नहीं देखा। 

धर्म कभी मुझे रोते हुए चुप कराने नहीं आया।

उसने मेरी स्कूल की फीस नहीं दी कभी। 

उसे ये भी नहीं पता 

मैं आजकल प्रेम में हूँ। 


इस अनजान धर्म को देख रहा हूँ,

धर्म के हाथों मार खाते आदमी को 

खून निकल रहा है-


धर्म बच रहा है,

आदमी नहीं बचेगा शायद।।



दुनियां में सबसे पहले कत्ल किसकी हुई थी?



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