UA-149348414-1 शांति के गीत

 

शांति के गीत

Source - UNICEF

Translator - Kashish "Bagi" 

Read originally in English -    Click Here


kashish-bagi


हमने अपनी मातृभूमि को देखा है, मौन और मरते हुए ...।

हमने इसे एक छोटी मोमबत्ती की तरह प्रकाश खोते देखा है,

हमने इसे हमारे भाग्य से दुखी अकेलेपन के झूले पर बैठे देखा है,

हो तो आखिर तुम मेरे घर ही लेकिन मुझे घायल और टूटा हुआ दिखाई देते हो,

हम...तूफानों के आगे सीना ताने एक पहाड़ हैं

हमारे दिल में शांति के सूरज को देखने की लालसा है,

हमारी युवा आत्माएँ बिना दोष, बिना हथियारों के शांत रहने की माँग करती हैं,

बिना तलवार या आग की शांति,

बंदूक की गोलियों के तांडव नृत्य के बिना शांति,

लोगों को गोली मारकर, तुमने अब आकाश को घायल कर दिया है,

अब वक्त है कि सूरज को उसकी जगमगाती रोशनी लौटाई जाए,

 हम अपने भीतर एक सुखद समय की याद को संजोए हैं,

और जितने दुःख हैं वो हमारे हृदय को आंदोलित करते है

हम अपने सर को आकाश की ओर ऊंचा उठा यह आशा करते हैं कि कल बदलाव आएगा,

आशा कहां चली गई?

और शांति ने तुम्हें मेरी मातृभूमि से कैसे निकाल दिया?

रोज लोगों को दफनाया जा रहा है

और दफनाई जा रही है उनके साथ उनकी उम्मीदें और सपने

इसके बाद भी हम उन रास्तों पर चलेंगे जिनको हमने चुना है,

बंदूको को पीछे छोड़, किताब और कलम हम साथ ले जाएंगे,

क्या तुम बारिश के  बाद की धरती को सूंघ सकते हो?

यह आशा की महक है, एक नए दिन की महक है

हम शांति, गर्मजोशी और साफ नीले आसमान का सपना देखते हैं,

ऐसा आसमान जिसमें पक्षियों के प्रार्थना के लिए गीत हो,

गौरैया खूबसूरत जोड़ों में नाच रही हो,

अपना घोंसला बनाने के लिए शांति की तलाश में हो,

जहां प्यार ने उन्हें आशीर्वाद दिया हो.....

 वह सारा दर्द जो हमें मिला वो पर्याप्त था

अब हमारे देश को जीवन और शांति की जरूरत है

 यह कुछ ऐसा है जिसके लिए हम प्रार्थना करते हैं जब हमें लगता है कि हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है

एक बच्चा सूरज के सुनहरी किरण में चल रहा है, एक मुस्कान के साथ जो इतना उज्ज्वल है कि यह एक सुस्त अंधेरी रात को भी प्रकाशमय दे

 हम ऐसे खूबसरत दिन की घंटों कल्पना कर सकते हैं

 हम में से हर कोई शांति और स्थिरता में रहने का सपना देखता है

शांति पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का खून नहीं देख रही है

शांति हमारे शब्दों में निहित है

हमारी मुस्कुराहट में, हमारी अंगुलियों में, जिनमें दर्द होता है

शांति के लिए कभी देर नहीं होती

शांति बिना नफरत के दुनिया में रह रही है.......¡!


- By Kashish "Bagi"


0 Comments