UA-149348414-1 मैं देर तक क्यों नहीं पढ़ पाता/पाती हूँ?

मैं देर तक क्यों नहीं पढ़ पाता/पाती हूँ?

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यकीन मानिये आज आपको इस समस्या का इलाज मिल जाने वाला है। भले आप में सुधार हो या न हो ये आप पर निर्भर करता है लेकिन इस बीमारी का इलाज आपके पास जीवन भर रहेगा। आईये ईस पर जरा नजर डालते हैं-

जब हम छोटे होते हैं पहली बार अल्फाबेट ( क ख ग..या फिर A B C...)  सिख रहे होते हैं तो हमारे लिए ये बिल्कुल नया होता है। चाहे हमारी बुद्धि तेज हो या न हो इसे हम सिख ही जाते है। सीखने के बस दो ही मनोवैज्ञानिक कारण है-

1-मनोरंजन में खेल समझ कर ( आज कल सरकार भी इसी पर ज्यादा जोर देती है)
2- मार के डर से ( पुरानी पद्धति है लेकिन आज भी कारगर है, भले आप मार न खाएं लेकिन आपको इसका डर है तो आप तेजी से सीखते है)

इसके बाद जब हम बड़े होते हैं स्कूली शिक्षा तक तो हमारे अच्छे से पढ़ते रहने के फिर से दो ही कारण होते हैं-

1- बेहतर करने और कक्षा में अव्वल आते रहने की लालसा।
2- फिर से वही मार कर डर।

जैसा मैने पहले कारण में एक शब्द का उपयोग किया है "लालसा" वो तब से शुरू होकर पूरे पढाई की उम्र तक हमसे जुड़ा रहता है। स्कूली शिक्षा के समय ही यह लालसा बदलता रहता है। जैसे किसी बच्चे से आप कहें की एक घण्टा और पढ़ लो तो उसका मनपसन्द चॉकलेट मिलेगा तो वो उस चॉकलेट की लालसा में 1 घण्टा पढ़ेगा। या आप किसी ऐसे बच्चे से बोलिये जिसे दुध पसन्द न हो कि पढोगे तो आज दूध नहीं पीना होगा। यकीन मानिये वो पढ़ेगा।
अगर निजी अनुभव बताऊँ तो मैं जब 8 साल का था तीसरी कक्षा की वार्षिक परीक्षा देकर मैं अपने भाई के साथ नानी के घर गया था।  उस वक्त मेरे मामा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन के छात्र थे। वो भी छुट्टी में घर आये हुए थे। उन्होंने एक लालच दिया की अगर तुममें से जो  भी जितना अंग्रेज़ी का मीनिंग याद करेगा उसे उतना रुपया मिलेगा। रोज नया नया टास्क मिलता गया और रुपये के लालच में टास्क पूरा भी होता गया। क्या आप अंदाजा लगा सकते है की उन 2 महीनों में मैने सीखा -

1- लाभ , हानि ,प्रतिशत के सवाल
2- त्रिभुज के सभी प्रकार
3- त्रिभुज का क्षेत्रफल एवम परिमाप
4- चतुर्भुज का क्षेत्रफल एवम परिमाप
5- पाईथा गोरस प्रमेय
6- 12 Tenses
7- Active & Passive voice
8- भार्गव इंग्लिश डिक्शनरी के बहुत सारे मीनिंग

एक 8 साल के छोटे बच्चे के सन्दर्भ में आपमे से हो सकता है कईयो को इसपर यकीन न हो,लेकिन मेरे लिए ये एक प्रेरणा है। जब भी मैं किसी विषय के बड़े और जटिल सिलेबस से घबराता हूँ तो यही सोचता हूँ की तब मैं उतना सब कर लिया था तो इसको पढ़ने में क्या है? फिर सब आसान लगता है।
 तो सारांश ये है की स्कूली शिक्षा के दौरान लालसा एक ऐसी चीज होती है जो हमें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती है,वो लालसा कुछ भी हो सकती है जैसे -

 1- टीचर की नजरों में अच्छा बनने के लिए।
 2- क्लास में प्रथम आने के लिए।
 3- क्लास में किसी को इम्प्रेस करने के लिए।
 4- क्लास में किसी तरह का अपमान न सहना पड़े इसके लिए।
  और मार का डर। स्कूली जीवन में अच्छे से पढ़ने का कारण इन्हीं के आस पास या इनसे ही मिलती जुलती लालसाओं के बीच घूमता रहता है।

लेकिन जब स्कूली शिक्षा खत्म होती है , हम पहुंचते है कॉलेज की दुनिया में ,हमारी पढ़ने की क्षमता को एक रोग लग जाता है, उस रोग का नाम है - मैं ज्यादा देर तक नहीं पढ़ पाता/पाती हूँ।

अगर पूछे कोई क्यों? .... तो जवाब आता है -

1- मन भटकने लगता है ( इसके कारण कई है लेकिन इलाज सिर्फ एक )
2- अगर रात को पढ़ रहे हों तो नींद आने लगता है ( समान इलाज)

आपको यही समस्या है तो खुश हो जाईये की आप अभी भी सेफ जोन में है।कम से कम उनसे तो बेहतर ही हैं जिनका पढ़ने का मन ही नहीं करता। ये रोग ऐसा है जैसे पागलपन। इसको सिर्फ तेज बिजली का झटका ही ठीक कर सकता है। वो बिजली की झटका होगा किसी की दिल को चुभ जाने वाली बात या कोई ऐसा ही जोर का झटका जो तगड़ा मोटीवेशन का काम करे।
             लेकिन आपकी समस्या कैंसर जैसी है जिसका समय पर इलाज हो गया तो ठीक वरना सब कुछ खत्म समझिये।
             इलाज शुरू करने से पहले एक कहानी बताता हूँ, यह कहानी ही आपका इलाज है।
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Image Source-Wikipedia
Milo of Croton by Joseph-Benoit Suvee


ग्रीस में 6वीं शाताब्दी में माईलो नाम का एक पहलवान था। वो क्रोटन शहर का रहने वाला था। क्या आपको याद है? सबसे महानतम धावक उसैन बोल्ट ने अपने रिटायरमेंट से पहले क्या कहा था? उसने कहा कि तीन ओलम्पिक मेडल जीतो और दुनिया में अमर हो जाओ। गौर करिये बस तीन।माईलो 6 ओलम्पिक मेडल जीते थे। 1 बच्चों की श्रेणी में और 5 वयस्क की श्रेणी में। माईलो की महानता का अंदाजा आप इसी से लगा चुके होंगे।
उसके बारे में कहा जात है की -

1- वो अपने एक कंधे पर एक सांड को लिए हुए अपनी नशों को इतना फूलाता था की माथे पर लगा बैंड टूट जाता था।

2- एक बार पाईथागोरस, किसी हाल के स्तम्भ के अचानक गिर जाने के कारण उसमे फंस गए तो,माईलो छत को तब तक थामे रहा जब तक की पाईथागोरस उसमे से बाहर न आ गए। इस तरह से माईलो ने पाईथागोरस की जान बचाई। ये वही दार्शनिक पाईथागोरस थे जिन्होंने पाईथागोरस प्रमेय की खोज की थी।

माईलो जब पहली बार पहलवानी की प्रोफेशनल ट्रेनिंग की शुरुआत किया तो उस समय ग्रीस के पहलवान अपनी ताकत का अंदाजा और अभ्यास सांड को उठा कर करते थे। कई बार के प्रयासों के बाद पहलवान कभी सांड को उठानें में सफल होते तो कभी असफल होते थे। लेकिन माईलो ने ऐसा नहीं किया-

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Image Source - stronglift.com


वो एक छोटा बछड़ा ले कर आया और पहले दिन से उसको उठाना शुरू किया। अंदाजा लगाइये सारे पहलवान ये देखकर हँसे होंगे। लेकिन माईलो की बछड़े को उठाने की सफलता का प्रतिशत कितना था ? 100%।

धीरे धीरे बछड़ा बड़ा होता गया और माईलो भी उसके अनुसार ताकतवर। रोज माईलो उस बछड़े को उठाने में सफल रहता यानी प्रतिदिन सफलता का प्रतिशत 100% ही रहता। धीरे धीरे बछड़ा सांड बन गया और माईलो की सफ़लता का प्रतिशत तब भी 100 ही था। वो इतना अभ्यस्त हो गया था की सांड को कंधे पर आराम से उठाये रख सकता था। जबकी रोज सांड उठाने वाले पहलवानो के लिए ये इतना आसान नहीं था। क्योंकि वो प्रतिदिन प्रयास करते थे और माईलो के लिए आसान था क्योंकि उसने प्रतिदिन अभ्यास किया था।

अब आप क्या करते हैं ? आपकी पढाई बिल्कुल नहीं हो पा रही है।एक दिन कहीं से कोई धक्का लगा की पढ़ना चाहिए। या कोई मोटिवेशनल स्टोरी पढ़ या देख लिया की फलाने इतना घण्टा पढ़ते थे। या आपके साथ का लड़का/लड़की इतना पढ़ता/पढ़ती है। आप किताब उठाते है एक दिन में घण्टो पढ़ने की नियत करके बैठ जाते हैं। ठीक उन पहलवानो की तरह जो रोज सांड उठाते थे। जैसे उनकी सफलता का प्रतिशत नियत नहीं था आपकी सफलता का प्रतिशत भी नियत नहीं रहेगा। फिर आपको समस्या आएगी ही कि आप देर तक नहीं पढ़ पाते/पाती हैं।
    ऐसे में आपको माईलो बनना है।पहले दिन की शुरुआत एक बछड़े से करनी है। आप पहला दिन 20-25 मिनट ही पढ़िए। फिर प्रतिदिन एक नियत दर से जो आपके लिए सम्भव हो बढाते जाईये। 1 महीने के अंदर आप घंटो पढ़  रहे होंगे। इसमे आपकी सफलता का प्रतिशत प्रतिदिन 100 होगा। आपको माईलो की तरह अभ्यास भी करना है न कि सिर्फ प्रयास।
    इसके बीच जब भी मन भटके आप खुद से एक सवाल कीजिये की जिस उम्र में आप हैं क्या आप पढाई छोड़कर -
    एक खिलाड़ी बन सकते है?
    एक एक्टर बन सकते है?
    या किसी और चीज़ में बहुत ही अच्छा कर सकते है?

    अगर जवाब हां है तो आप पढाई छोड़ वही करना शुरू करिये लेकिन अगर जवाब ना है तो आपको जो कैंसर है और उसका इलाज सिर्फ माईलो बन कर पढ़ कर ही किया जा सकता है। जितना देर आप अपना इलाज शूरु करने में करेंगे ये उतना ही घातक होता जाएगा।
         कुछ लोगो के दिमाग में फिट होता है 8 घण्टे की नींद जरूरी है। वरना 36 तरह के रोग लग जाते है और आयु कम हो जाती है। कहाँ हो भाई आप? किस दुनिया में जी रहे हो? जिन्होंने भी दुनिया बदला और एक मुकाम हासिल किया उनमे से कोई भी 8 घण्टे नहीं सोता था। आपको जानकर ये ताज्जुब होगा की दुनिया के सबसे ईमानदार और मेरे सबसे पसंदीदा वैज्ञानिक निकोला टेस्ला 24 घण्टे में सिर्फ 90 मिनट सोते थे और 87 साल का एक स्वस्थ जीवन बिताए। हम टेस्ला की महानता और काबिलियत की फिर कभी और बात करेंगे। लेकिन आप अपने जीवन के कुछ वर्ष ,कम से कम 4..5 घण्टे सोकर तो निकाल ही सकते हैं। आपको स्वस्थ रहने के लिए 8-10 घण्टे की नींद नहीं एक स्वस्थ और नियत दिनचर्या की जरूरत है। आप 4 दिन घण्टो सो कर फिर एक दिन 4 घंटे सोएंगे तो आपके स्वास्थ्य पर असर आएगा ही। लेकिन क्या होगा यदि रोज आप सिर्फ 4-5 घण्टे ही सोएं। धीरे-धीरे आपका शरीर इसका अभ्यस्त हो जायेगा। ये काम भी आप माईलो की रोज अभ्यास के सिद्धान्त के अनुसार ही धीरे धीरे अपनी आदत में लाएं।
         अपने सपने को सच ना कर पाने वालों में से 90% से ज्यादा उस सपने को भुला नहीं पाते और उस सपने को किसी अपने सगे में जीना शुरू कर देते हैं जैसे की मैं नहीं कर पाया तो मेरा बेटा/बेटी/बहन/भाई करेगा।
         लेकिन आप पढ़िए -
         उन सपनो के लिए जिनको आप किसी और में नहीं जी सकते।
         क्योंकि पढ़ना ही आपका विकल्प है।
         क्योंकि आप बचपन से पढ़कर ही यहां तक पहुंचे है तो आगे भी यही पढाई मुकाम दिलाएगी।

नोट - कड़े मेहनत के बाद भी सफलता एक झटके में नहीं मिलती। लेकिन आप मेहनत और अभ्यास नहीं करते रहेंगे तो आपकी हर असफलता आपके सामने हार बनती जाएगी। एक दिन आप खुद हारा हुआ महसूस करेंगे।उस दिन आपके सपने के सफर का अंत वहीं हो जाएगा। लेकिन निरन्तर अभ्यास और मेहनत आपकी असफलता को हार नहीं बनने देगी बल्कि और मेहनत करने की प्रेरणा देगी। आप असफल हो सकते हैं वो मंजूर है लेकिन आप हार नहीं सकते। आपको निरन्तर अभ्यास और मेहनत करना पड़ेगा जब तक आप वो हासिल न कर लें जो आप चाहते हैं।
     

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