UA-149348414-1 Live in present moment

Live in present moment


Live-in-present-moment
Live-in-present-moment


जिंदगी कोई ड्रेस रिहर्सल नहीं है। हम किसी भी दर्शन में विश्वास करते हों, पर हमें जिंदगी का खेल खेलने का मौका केवल एक ही बार मिलता है।दांव पर इतनी कीमती चीजें लगी होती है कि आप जिंदगी यूं ही बरबाद नहीं कर सकते। दांव पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य लगा होता है।

Live-in-present-moment
Live-in-present-moment


         हम कहां हैं और किस दौर में हैं? जवाब है कि इसी दौर में है, और यहीं है। इसलिए हम आज को बेहतर बनाएं और इसका भरपूर आनन्द लें । इसका यह मतलब नहीं है कि हमें भविष्य के लिए कोई योजना नहीं बनानी चाहिए, बल्कि पैगाम यह है कि हमें आगे की योजना बनाने की ही जरूरत है और अगर हम अपने ' आज ' का भरपूर इस्तेमाल खुशहाली के लिए कर रहे हैं, तो हम खुद ब खुद आने वाले बेहतर कल के लिए बीज बो रहे हैं।क्या हम मानते हैं?


           अगर हम अपने नजरिए को साकारात्मक बनाना चाहते हैं, तो टालमटोल की आदत छोड़ें, और ' तुरंत काम करो ' पर अमल करना सीखें।


           जिंदगी में सबसे दुःख भरे शब्द है -

           " " ऐसा हो सकता था।"

           " मुझे ऐसा करना चाहिए था।"

           " मैं यह कर सकता था।"

           "काश ! मैंने ऐसा किया होता।

           " अगर मै थोड़ी और कोशिश करता, तो यह काम हो सकता था।"


  • जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कभी भी कल पर न टालें। _   बेंजामिन फ्रैंकलिन

Live-in-present-moment
Live-in-present-moment

       मुझे यकीन है की जीत हासिल करने वालों के मन में भी टालमटोल करने की इच्छा जरूर पैदा हुई होगी, पर उन्होंने उसे अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया ।
       लोग जब कहते हैं, " मैं यह काम किसी और दिन करूंगा", तो इस बात को तय मां लीजिए कि वे उस काम को कभी नहीं करेंगे।
       कुछ लोग इस बात का इंतजार करते रहते हैं कि उनके घर से निकलने से पहले सारी लाल बत्तियां हरा सिग्नल देने लगें, पर ऐसा कभी नहीं होता। वे शुरुआत करने से पहले ही नाकामयाब हो जाते हैं।यह दुखद स्थिति है।
       टालमाटोल करना बंद करें। क्या हमें बहानेबाजी करने को आदत को इसी समय ' अलविदा ' नहीं कर देना चाहिए ?




सोर्स -  You can win By Shiv Khera

Article written by कशिश "बागी"

Support us through Paytm/Paypal/Google pay/Phone pe @8542975882

0 Comments