UA-149348414-1 क्या एक अच्छा शैक्षिक पृषठभूमि का होना आपके सफल जीवन की गारंटी है? - A true motivational story of Hamilton Naki

क्या एक अच्छा शैक्षिक पृषठभूमि का होना आपके सफल जीवन की गारंटी है? - A true motivational story of Hamilton Naki

क्या एक अच्छा शैक्षिक पृषठभूमि का होना आपके सफल जीवन की गारंटी है? - A true motivational story Hamilton Naki


अफ्रीका के एक पिछड़े गांव का लड़का

पहाड़ियों पर बकरियां चराता !!

पिता की बीमारी के चलते केपटाउन आता है ।उन दिनों केपटाउन मेडिकल यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य चल रहा था और वह वहां मजदूरी करने लगा । जब निर्माण कार्य खत्म हुआ तो वह वहां माली की नौकरी करने लग पड़ा। 3 साल वहां घास काटने की नौकरी की।

यहां से वह अध्याय आरंभ होता है जिसने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी। इस लड़के का नाम था : हैमिल्टन नाकी



1958 में वहां के एक प्रोफ़ेसर Robert .H Gootz जोकि जिराफ पर रिसर्च कर रहे थे, उन्होंने जिराफ को बेहोश करके उसका ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान जिराफ के गर्दन हिलाने के कारण रॉबर्ट को मुश्किल पेश आ रही थी ।रॉबर्ट ने अपने कमरे के बाहर दृष्टि दौड़ाई, वहां घास काटता हुआ हैमिल्टन नजर आया । डॉ रॉबर्ट ने उसकी मजबूत कद काठी देखी और उसे अंदर आकर जिराफ की गर्दन पकड़कर रखने को कहा।


8 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में हैमिल्टन ने जिराफ को सही से पकड़े रखा और पूरी प्रक्रिया को देखते-देखते हैमिल्टन ने आंख तक ना झपकी।

क्या एक अच्छा शैक्षिक पृषठभूमि का होना आपके सफल जीवन की गारंटी है? - A true motivational story Hamilton Naki
हैमिल्टन के साथ डॉ बर्नाड


फिर यह उसकी ड्यूटी बन गई ।ऑपरेशन थिएटर में जानवरों को पकड़ना और साथ ही साथ माली का काम करना।


हैमिल्टन की लगन देखकर उसे रॉबर्ट ने अपनी लैब में लैब सहायक बना दिया।

साठ के दशक में डाक्टर क्रिश्चियन बर्नार्ड ने दिल के प्रत्यारोपण ऑपरेशन शुरू किए। हैमिल्टन इस काम में भी उनका सहायक बन गया । बर्नार्ड ने उसे टांके लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी, जिसमें वह बहुत निपुण हो गया। इस दौरान उसने इंसानी दिल और शरीर का गहन अध्ययन कर लिया था। वह इतना निपुण हो चुका था कि जूनियर डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने लग पड़ा।

1970 सत्र में उसके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ आया जब लीवर पर रिसर्च के दौरान उसने ऐसी नाड़ी की खोज की जिसके कारण लिवर ट्रांसप्लांट ऑपरेशन करना संभव हो गया ।

जिगर के प्रत्यारोपण के सफल ऑपरेशन का श्रेय जाता है हैमिलटन नाकी को।

अब देखा जाए तो ना तो उसके पास कोई शैक्षणिक डिग्री थी ना ही कोई ज्यादा पढ़ाई लिखाई ।लेकिन साथ थी अथक मेहनत और सीखने का जज़्बा। डॉक्टर बैजनाथ के शब्दों में उसमें सीखने की अद्भुत लगन थी जब हमने हार्ट ट्रांसप्लांट ऑपरेशन भी किए तब भी वह बहुत जूनियर डॉक्टरों से बहुत बेहतर था।

डॉ. बर्नार्ड के शब्दों में , "जिगर का ऑपरेशन हार्ट के ऑपरेशन से भी कहीं ज्यादा जटिल होता है ।मैं खुद जिगर के ऑपरेशन नहीं कर सकता था ,लेकिन हैमिल्टन इस काम में दक्ष था । जबकि उसके पास कोई डिग्री नहीं थी ।यह सब उसने अपनी मेहनत और अनुभव से सीखा।"

हैमिल्टन सुबह 3:00 बजे घर से निकलता ।14 मील चलकर 6:00 ऑपरेशन ऑपरेशन थिएटर पहुंचता ।अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उसने कभी छुट्टी नहीं ली। उसने अपने जीवन काल में 30,000 सर्जन को ट्रेनिंग दी।

29 मई 2005 को 78 वर्ष की उम्र में उसका देहांत हुआ मृत्यु पश्चात उसे वही यूनिवर्सिटी में दफनाया गया।

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रंगभेद की नीति के कारण वर्षों तक उसे अपने किए का श्रेय नहीं मिला। लेकिन 2003 में उनकी महान उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें मास्टर ऑफ मेडिसिन की उपाधि से विभूषित किया गया।

सफल जीवन के लिए अच्छी शैक्षणिक पृष्ठभूमि आवश्यक नहीं बल्कि आवश्यक है कि आप हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहें। लोगों से सही तालमेल बनाए रखें। अच्छी शैक्षणिक पृष्ठभूमि अवश्य ही मदद करती है, लेकिन यही सब कुछ नहीं।

अपने घास काटने के काम से इतर ,उसने एक डॉक्टर के सहायक के रूप में काम करने के लिए हामी भरी ,जो के लिए उसके लिए भी एक नया अनुभव था ।वह चाहता तो उस वक्त ना करके सारी जिंदगी एक माली ही बना रहता ।लेकिन उसकी सीखने की इच्छा और जिज्ञासु प्रवृत्ति ने उसे एक मुकाम दिलवाया।

सफल जीवन केवल शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर निर्भर नहीं!!!

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