UA-149348414-1 Rebel Thoughts(बागी विचार)
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किसान - कृषि अध्यादेश और मोदी सरकार की हकीकत

किसान - कृषि अध्यादेश और मोदी सरकार की हकीकत भारत अंग्रेज़ो की गुलामी से लम्बे संघर्षों और अनगिनत बलिदानों के बाद 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ। अगर तकनीकी रूप से कहा जाए तो यह पूर्ण रूप से आजादी नहीं बल्कि मात्र एक सत्ता हस्तांतरण ही था। अभी भारत को जमीनी तौर पर आज़ा…

मोहनजोदड़ो की आखिरी सीढ़ी से

मोहनजोदड़ो की आखिरी सीढ़ी से   मैं साइमन न्याय के कटघरे में खड़ा हूं प्रकृति और मनुष्य मेरी गवाही दे! मैं वहां से बोल रहा हूं जहां मोहनजोदड़ो के तालाब के आखिरी सीढ़ी है जिस पर एक औरत की जली हुई लाश पड़ी है और तालाब में इंसानों की हड्डियां बिखरी पड़ी हैं इसी तरह एक औरत …

औरतें

औरतें कवि - विद्रोही कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं ऐसा धर्म की किताबों में लिखा हुआ है मैं कवि हूँ, कर्त्ता हूँ क्या जल्दी है मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ और…

मैं किसान हूँ - विद्रोही

मैं किसान हूँ - विद्रोही नई खेती मैं किसान हूँ आसमान में धान बो रहा हूँ कुछ लोग कह रहे हैं कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता मैं कहता हूँ पगले! अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है तो आसमान में धान भी जम सकता है और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा या तो ज़मीन से भगवान…

इक आग का दरिया है

इक आग का दरिया है कविता - इक आग का दरिया है कवि - रमाशंकर यादव 'विद्रोही' विरह मिलन है, मिलन विरह है, मिलन विरह का, विरह मिलन का ही जीवन है। मैं कवि हूँ और तीन-तीन बहनों का भाई हूँ, हल्दी, दुब और गले की हंसुली से चुम-चुम कर बहिनों ने मुझे प्यार करना सिखाया है…

वो पुराने दिन

वो पुराने दिन वो पुराने दिन, वो सुहाने दिन, आशिकाने दिन, ओस की नमीं में भीगे वो पुराने दिन दिन गुजर गए, हम किधर गए, पीछे मुड़ के देखा पाया सब ठहर गए, अकेले हैं खड़े, कदम नही बढ़े, चल पड़ेगें जब भी कोई राह चल पड़े, जाएंगे  कहां? है कुछ पता नहीं, कह रहे हैं वो कि हम किये खत…