UA-149348414-1 Love poem

  1.                                            A poem for you
  


       बता कौन है यहां मनुष्य जिसे डर ने छला न हो,,,?
         कौन है यहां जिसकी आँखे न नम हुयी हो,,,?
              कौन है यहां जिसने आह न भरी हो,,,?
                हूँ मैं भी मनुष्य अपवाद तो नहीं हूं,,,
            काटे हमने भी कई रात रोतें हुए बिना सोये,,,
   काटे है अपने हर गम तेरे चुराये हुए तस्वीरों को देखते हुए,,,
भूले हैं अपना हर दर्द तुम्हारे चुराई हुई आवाज को सुनते हुए,,,
           सच लगता था यही अब जिंदगी का सफर है,,,
love poem

      लेकिन कौन हारा है कभी जिसकी उम्मीदे सच्ची हो,,,
          कब हारा है वो इश्क जिसका प्यार सच्चा हो,,,
                   हार हमारी किस्मत में भी न थी,,,
         लुटाये तुमने प्यार का सागर मुझपे एक दिन ऐसे,,,
लगा सदियों से जंजीरों में फंसी जिन्दगि बदल गयी हो जैसे,,,
भर लिया बाहों में इस कदर जैसे बिखर कर सिमटे हों अब जाकर,,,
लबों को चूमा है इस कदर जैसे प्यास बुझी हो सदियों प्यासा रहकर,,,
         मिले हो द्वारिका में कृष्ण रुक्मणि से जैसे,,,
          जज्बात बदले हैं इस कदर न जाने कैसे,,,
        अब जीवन भर गया है बसन्त की बहारों से,,,
     खुशियों के फूल झरते है हर पल तेरे मुस्कराने से,,,
  माना कि आँखे अब भी भादो बन बरस पड़ती हैं कभी कभी
 लेकिन मेरे दिल अजीज मेरी जान वो आँखे अब दर्द में कभी नहीं रोती
वो आँखे अब रोती है तो मेरे महबूब के साथ बिताये बहारों  के पल के लिए
ऐ मेरे दिलनशीं तुम हाथ थामे रहो युहीं जन्मों जन्मों तक
हम तुम्हारी बाहों में युगों युगों तक युहीं मुस्कराते रहेंगे।।।

                     BY- KASHISH
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